Pachimi Gyanodyay ke Vaicharik Sankat (पश्चिमी ज्ञानोदय के वैचारिक संकट)

Price: 450.00 INR

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ISBN:

9780199489664

Publication date:

04/02/2019

Paperback

272 pages

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9780199489664

Publication date:

04/02/2019

Paperback

272 pages

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Rights:  World Rights

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Description

यह पुस्तक पश्चिमी ज्ञानोदय की अवधारणा और उससे प्रभावित समकालीन विमर्शों का एक आलोचनात्मक विश्लेषण करती है। तकनीक, संगठन और भौतिकवादी जीवन के सैद्धांतिक अवलोकन के साथ गाँधी और पाश्चात्य विमर्शों की तुलना को प्रस्तुत करती है। यह बताती है कि समृद्धि से समानता प्राप्त करने का लक्ष्य खोखला साबित हो रहा है। इस लक्ष्य के भ्रामक दावों को उत्तर-आधुनिकतावाद, नारीवाद, बहुसांस्कृतिवाद और समकालीन मार्क्सवाद भी बढ़ावा दे रहे हैं। तकनीकी विश्वदृष्टि में अस्तित्वात्मक मानवीय समस्याओं का अनुभवमूलक समाधान तो है जिसमें अनेक पाश्चात्य विद्वान आकंठ डूबे भी रहे हैं पर वह मानव का अवमूल्यन किए बिना संभव नही है। सभ्यता विमर्श की दृष्टि से उपरोक्त विमर्शों पर उठने वाले सवाल किस तरह से गाँधी विमर्श को केंद्र में ला रहे हैं। प्रस्तुत पुस्तक समकालीन पाश्चात्य विमर्शों के इन्ही उहापोहों को समालोचनात्मक तरीके से उद्घाटित करती है। English Translation This book is a discursive intervention in reconceptualising and re-contextualizing the multifaceted impact of Western enlightenment. It interrogates, from the perspective of Indian world-views and wisdom traditions-such as that of Gandhi's Hind Swaraj-the discourses of liberation inherent in the tradition of enlightenment or post-enlightenment culture and society. The author in this book highlights the ruptures and gaps in western discourses such as those of modernity, poststructuralism, postmodernism, deconstruction, nihilism, feminism, and multiculturalism, while also addressing the anomalies within these frameworks using Indian discursive perspectives which are dhrama centric yet open ended. The author in this book uses a comparative lens to expand the scope of Gandhi's Hind Swaraj with respect to enlightenment thought in order to examine issues of equality, freedom, wealth generation- distribution, industrial society and its epistemology. About the Author डॉ. विश्वनाथ मिश्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आर्य महिला पी.जी. कॉलेज में अध्यापन करते हैं। वे समकालीन राजनीतिक सिद्धांत तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध विषयों के अध्येता हैं। English Translation Vishwanath Mishra is Assistant Professor in Political Science at Arya Mahila Post Graduate College, Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh.

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Table of contents

विषय-सूची

प्राक्कथन

अध्याय – 1 उत्तर-आधुनिकतावाद

1.1 उत्तर-आधुनिकतावाद : अवधारणा की विकास-यात्रा

1.2 उत्तर-आधुनिक पद्धतिशास्त्र (पोस्ट-मॉडर्न मेथडोलॉजी) 

1.3 शून्यवाद (निहिलिज़्म)

1.4 विखंडनवाद (डि-कंस्ट्रक्शनिज़्म)

1.5 ज्ञान का पुरातत्व एवं आनुवांशिकी (आर्कियोलॉजी एंड जीनियोलॉजी ऑफ़ नॉलेज)

1.6 भाषायी खेल (लैंग्वेज गेम)

1.7 भारतीय प्रत्युत्तर

अध्याय - 2 नारीवादी विमर्श

2.1  नारीवादी ज्ञानमीमांसा

2.2  उत्तर-आधुनिक नारीवाद

2.3  मार्क्सवादी नारीवाद

2.4  आस्तित्वादी नारीवाद

2.5  रेडिकल नारीवाद

अध्याय - 3  बहुसंस्कृतिवाद

3.1 बहुसंस्कृतिवाद की आंतरिक विविधता एवं विसंगति

3.2 बहुसंस्कृतिवाद की ऐतिहासिक एवं सैद्धांतिक विकास-यात्रा : पुनर्वितरण एवं मान्यता की राजनीति

3.3 बहुसंस्कृतिवाद : समुदायवाद से वैश्वीकरण तक

3.4 बहुसंस्कृतिवाद के विभिन्न प्रतिमान

3.5 बहुसंस्कृतिवाद : सांस्कृतिक एकता एवं समानता का द्वंद्व और उदारवादी पहचान व मान्यता की राजनीति का भ्रम

अध्याय - 4 समुदायवाद

4.1 समुदायवाद : समकालीन परिचर्चा के आयाम

4.2 चार्ल्स टेलर

4.3 माइकल सैंडल

4.4 माइकल वॉल्जर

4.5 मैकिंटायर

4.6 समुदायवाद की सीमाएँ

अध्याय - 5 समकालीन मार्क्सवाद

5.1 मानवीय प्रकृति : स्वतंत्रता एवं सुरक्षा का द्वंद्व

5.2 मशीन : समृद्धि, समानता और निर्धारणवाद

5.3 भाषा : आधार और अधिसंरचना

अध्याय - 6 गाँधीवाद

6 .1  हिंद स्वराज : पठन एवं विश्लेषण का गाँधीवादी दृष्टिकोण

6 .2  हिंद स्वराज : भाषा और सभ्यता के अंतर्संबंधों की गाँधीवादी मीमांसा

6 .3  हिंद स्वराजः कॉरपोरेट अर्थव्यवस्था और विकास की गाँधीवादी मीमांसा

6 .4 हिंद स्वराज : उदारवादी संसदीय जनतांत्रिक प्रणाली की गाँधीवादी मीमांसा

6 .5 हिंद स्वराज : आधुनिक सभ्यता की ज्ञानमीमांसा की गाँधीवादी समालोचना

संदर्भ-ग्रंथ सूची

अनुक्रम

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Vishwanath Mishra (डॉ. विश्वनाथ मिश्र)

Description

यह पुस्तक पश्चिमी ज्ञानोदय की अवधारणा और उससे प्रभावित समकालीन विमर्शों का एक आलोचनात्मक विश्लेषण करती है। तकनीक, संगठन और भौतिकवादी जीवन के सैद्धांतिक अवलोकन के साथ गाँधी और पाश्चात्य विमर्शों की तुलना को प्रस्तुत करती है। यह बताती है कि समृद्धि से समानता प्राप्त करने का लक्ष्य खोखला साबित हो रहा है। इस लक्ष्य के भ्रामक दावों को उत्तर-आधुनिकतावाद, नारीवाद, बहुसांस्कृतिवाद और समकालीन मार्क्सवाद भी बढ़ावा दे रहे हैं। तकनीकी विश्वदृष्टि में अस्तित्वात्मक मानवीय समस्याओं का अनुभवमूलक समाधान तो है जिसमें अनेक पाश्चात्य विद्वान आकंठ डूबे भी रहे हैं पर वह मानव का अवमूल्यन किए बिना संभव नही है। सभ्यता विमर्श की दृष्टि से उपरोक्त विमर्शों पर उठने वाले सवाल किस तरह से गाँधी विमर्श को केंद्र में ला रहे हैं। प्रस्तुत पुस्तक समकालीन पाश्चात्य विमर्शों के इन्ही उहापोहों को समालोचनात्मक तरीके से उद्घाटित करती है। English Translation This book is a discursive intervention in reconceptualising and re-contextualizing the multifaceted impact of Western enlightenment. It interrogates, from the perspective of Indian world-views and wisdom traditions-such as that of Gandhi's Hind Swaraj-the discourses of liberation inherent in the tradition of enlightenment or post-enlightenment culture and society. The author in this book highlights the ruptures and gaps in western discourses such as those of modernity, poststructuralism, postmodernism, deconstruction, nihilism, feminism, and multiculturalism, while also addressing the anomalies within these frameworks using Indian discursive perspectives which are dhrama centric yet open ended. The author in this book uses a comparative lens to expand the scope of Gandhi's Hind Swaraj with respect to enlightenment thought in order to examine issues of equality, freedom, wealth generation- distribution, industrial society and its epistemology. About the Author डॉ. विश्वनाथ मिश्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आर्य महिला पी.जी. कॉलेज में अध्यापन करते हैं। वे समकालीन राजनीतिक सिद्धांत तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध विषयों के अध्येता हैं। English Translation Vishwanath Mishra is Assistant Professor in Political Science at Arya Mahila Post Graduate College, Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh.

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Table of contents

विषय-सूची

प्राक्कथन

अध्याय – 1 उत्तर-आधुनिकतावाद

1.1 उत्तर-आधुनिकतावाद : अवधारणा की विकास-यात्रा

1.2 उत्तर-आधुनिक पद्धतिशास्त्र (पोस्ट-मॉडर्न मेथडोलॉजी) 

1.3 शून्यवाद (निहिलिज़्म)

1.4 विखंडनवाद (डि-कंस्ट्रक्शनिज़्म)

1.5 ज्ञान का पुरातत्व एवं आनुवांशिकी (आर्कियोलॉजी एंड जीनियोलॉजी ऑफ़ नॉलेज)

1.6 भाषायी खेल (लैंग्वेज गेम)

1.7 भारतीय प्रत्युत्तर

अध्याय - 2 नारीवादी विमर्श

2.1  नारीवादी ज्ञानमीमांसा

2.2  उत्तर-आधुनिक नारीवाद

2.3  मार्क्सवादी नारीवाद

2.4  आस्तित्वादी नारीवाद

2.5  रेडिकल नारीवाद

अध्याय - 3  बहुसंस्कृतिवाद

3.1 बहुसंस्कृतिवाद की आंतरिक विविधता एवं विसंगति

3.2 बहुसंस्कृतिवाद की ऐतिहासिक एवं सैद्धांतिक विकास-यात्रा : पुनर्वितरण एवं मान्यता की राजनीति

3.3 बहुसंस्कृतिवाद : समुदायवाद से वैश्वीकरण तक

3.4 बहुसंस्कृतिवाद के विभिन्न प्रतिमान

3.5 बहुसंस्कृतिवाद : सांस्कृतिक एकता एवं समानता का द्वंद्व और उदारवादी पहचान व मान्यता की राजनीति का भ्रम

अध्याय - 4 समुदायवाद

4.1 समुदायवाद : समकालीन परिचर्चा के आयाम

4.2 चार्ल्स टेलर

4.3 माइकल सैंडल

4.4 माइकल वॉल्जर

4.5 मैकिंटायर

4.6 समुदायवाद की सीमाएँ

अध्याय - 5 समकालीन मार्क्सवाद

5.1 मानवीय प्रकृति : स्वतंत्रता एवं सुरक्षा का द्वंद्व

5.2 मशीन : समृद्धि, समानता और निर्धारणवाद

5.3 भाषा : आधार और अधिसंरचना

अध्याय - 6 गाँधीवाद

6 .1  हिंद स्वराज : पठन एवं विश्लेषण का गाँधीवादी दृष्टिकोण

6 .2  हिंद स्वराज : भाषा और सभ्यता के अंतर्संबंधों की गाँधीवादी मीमांसा

6 .3  हिंद स्वराजः कॉरपोरेट अर्थव्यवस्था और विकास की गाँधीवादी मीमांसा

6 .4 हिंद स्वराज : उदारवादी संसदीय जनतांत्रिक प्रणाली की गाँधीवादी मीमांसा

6 .5 हिंद स्वराज : आधुनिक सभ्यता की ज्ञानमीमांसा की गाँधीवादी समालोचना

संदर्भ-ग्रंथ सूची

अनुक्रम

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