Adha Sher (आधा शेर)

P.V. Narasimha Rao ne Kaise Bharat ko Badla (पी.वी. नरसिम्हा राव ने भारत को कैसे बदला)

Price: 495.00 INR

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Disclaimer :You will be redirected to a third party website.The sole responsibility of supplies, condition of the product, availability of stock, date of delivery, mode of payment will be as promised by the said third party only. Prices and specifications may vary from the OUP India site.

ISBN:

9780199470570

Publication date:

22/06/2018

Paperback

400 pages

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9780199470570

Publication date:

22/06/2018

Paperback

400 pages

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

With exclusive access to Narasimha Rao's never-before-seen personal papers as well as over a hundred interviews, this biography provides new revelations on the Indian economy, nuclear programme, foreign policy and the Babri Masjid. While tracing Rao's life from a village in Telangana through his years in power and humiliation in retirement, the book never loses sight of the inner man, his difficult childhood, his corruptions and love affairs, his lingering loneliness. Meticulously researched and honestly told, this landmark political biography is a must-read for anyone interested in the man responsible for transforming India. This is the Hindi translation of the English edition.

Rights:  World Rights

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

Description

पी.वी. नरसिम्‍हा राव 1991 में भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्हें एक लक्ष्‍यहीन राष्‍ट्र विरासत में मिला जो आर्थिक संकट और हिंसक विद्रोहों से जूझ रहा था। अपने लोगों का प्रेम न मिलने, अपनी पार्टी द्वारा संशय की दृष्टि से देखे जाने, संसद में अल्‍पमत होने और 10 जनपथ की परछाई में शासन करने के बावजूद राव ने देश के भीतर और बाहर एक नए भारत को गढ़ा। दुनिया के बहुत कम नेताओं ने इतनी कम शक्ति में इतना कुछ हासिल किया। यह क़िताब नरसिम्हा राव के निजी और राजनैतिक जीवन के अनकहे पहलूओं को बयां करती है। उन पहलूओं को जिन्होंने नब्बे के दशक के बाद इस देश को बदल दिया। सौ से भी अधिक साक्षात्‍कारों और अनगिनत निजी दस्तावेजों की मदद से तैयार यह क़िताब, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था, परमाणु कार्यक्रम, विदेश नीति और बाबरी मस्जिद पर नई रोशनी डालती है। तेलंगाना के एक गाँव से लेकर सत्‍ता तक पहुँचने और सेवानिवृत्ति में हुई अवमानना तक की राव की समूची यात्रा में यह पुस्‍तक उनके भीतर के व्‍यक्ति, उनके मुश्किलों से भरे बचपन, उनके भ्रष्‍टाचारों, उनके प्रेम प्रसंगों और उनके अकेलेपन की कहानी कहती है।
English Translation
When P.V. Narasimha Rao became the unlikely prime minister of India in 1991, he inherited economic crisis, violent insurgencies and a nation adrift. Despite being unloved by his people, mistrusted by his party, a minority in Parliament and ruling under the shadow of 10 Janpath, Rao reinvented India, at home and abroad. Few world leaders have achieved so much with so little power. With exclusive access to Rao's never-before-seen personal papers as well as over a hundred interviews, this definitive biography provides new revelations on the Indian economy, nuclear programme, foreign policy and the Babri Masjid. While tracing Rao's life from a village in Telangana through his years in power and humiliation in retirement, the book never loses sight of the inner man, his difficult childhood, his corruptions and love affairs, his lingering loneliness. Meticulously researched and honestly told, this landmark political biography is a must-read for anyone interested in the man responsible for transforming India. This is the Hindi translation of the English edition.

About the Author
विनय सीतापति
राजनीतिविज्ञानी, पत्रकार और वकील हैं। अशोका यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और इंडियन एक्‍सप्रेस के लिए लिखते हैं। उन्‍होंने नेशनल लॉ स्‍कूल, बंगलौर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने प्रिंस्‍टन से राजनीति विज्ञान में शोध किया है।
English Translation
Vinay Sitapati is a political scientist, journalist, and lawyer. He teaches at Ashoka University and writes for the Indian Express. He has studied at the National Law School, Bangalore and Harvard University and is finishing his Ph.D. in politics from Princeton University.

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

Table of contents


Anuvadak ki Aur Se

1. Adhjala Shav
2. Andhra ke Samajwadi, 1921-71
3. Kathputli Mukhyamantri, 1971-73
4. Nirvasan, 1973-74
5. Dilli Durbar, 1975-91
6. Sanyasi se Samrat
7. Arthvyavastha ka Uddhar, 1991-92
8. Arthvyavastha ka Vikas, 1992-96
9. Kalyankari Rajya?
10. Party aur Sansan mein Astitva Banaye Rakhna
11. Sonia ko Sambhalna
12. Babri Masjid ka Dhehna
13. Look East, Look West
14. Parmanu Hathiyar
15. Singh, Lomri, Chuha

Abhiswikriti
Tippaniyan
Anukramanika
Lekhak avum Anuvadak Parichay

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

Review


एक विद्वान और गूढ़ प्रधानमंत्री का असाधारण वर्णन। इतिहास पी.वी. नरसिम्‍हा राव के प्रति निर्मम रहा है। विनय सीतापति ने उन्‍हें नया जीवन दिया है।
—के. नटवर सिंह
पी.वी. नरसिम्‍हा राव आसानी से समझ में न आने वाले और मुख्‍य रूप से एक असम्‍मानित व्‍यक्तित्‍व रहे हैं। उनके कार्य और प्रभाव के इस दिलचस्‍प अध्‍ययन में विनय सीतापति ने आधुनिक भारतीय इतिहास में राव को उनके सही स्‍थान पर फिर से स्‍थापित किया है।
—रामचंद्र गुहा
सीतापति, इतिहास और राजनीति को अंतरंग किस्‍सों की चाशनी में लिपटी हुई कड़वी दवा के रूप में पेश करते हैं... हाफ़-लायन लोकप्रिय और शैक्षणिक दायरों, दोनों में अपनी जगह बनाती है।
—फ़ोर्ब्‍स
विनय सीतापति के हाफ़-लायन (पेंग्विन) ने नरसिम्‍हा राव पर एक गंभीर विद्वतापूर्ण बहस शुरू की है।
—प्रताप भानु मेहता, सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च

Vinay Sitapati (विनय सीतापति)

Description

पी.वी. नरसिम्‍हा राव 1991 में भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्हें एक लक्ष्‍यहीन राष्‍ट्र विरासत में मिला जो आर्थिक संकट और हिंसक विद्रोहों से जूझ रहा था। अपने लोगों का प्रेम न मिलने, अपनी पार्टी द्वारा संशय की दृष्टि से देखे जाने, संसद में अल्‍पमत होने और 10 जनपथ की परछाई में शासन करने के बावजूद राव ने देश के भीतर और बाहर एक नए भारत को गढ़ा। दुनिया के बहुत कम नेताओं ने इतनी कम शक्ति में इतना कुछ हासिल किया। यह क़िताब नरसिम्हा राव के निजी और राजनैतिक जीवन के अनकहे पहलूओं को बयां करती है। उन पहलूओं को जिन्होंने नब्बे के दशक के बाद इस देश को बदल दिया। सौ से भी अधिक साक्षात्‍कारों और अनगिनत निजी दस्तावेजों की मदद से तैयार यह क़िताब, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था, परमाणु कार्यक्रम, विदेश नीति और बाबरी मस्जिद पर नई रोशनी डालती है। तेलंगाना के एक गाँव से लेकर सत्‍ता तक पहुँचने और सेवानिवृत्ति में हुई अवमानना तक की राव की समूची यात्रा में यह पुस्‍तक उनके भीतर के व्‍यक्ति, उनके मुश्किलों से भरे बचपन, उनके भ्रष्‍टाचारों, उनके प्रेम प्रसंगों और उनके अकेलेपन की कहानी कहती है।
English Translation
When P.V. Narasimha Rao became the unlikely prime minister of India in 1991, he inherited economic crisis, violent insurgencies and a nation adrift. Despite being unloved by his people, mistrusted by his party, a minority in Parliament and ruling under the shadow of 10 Janpath, Rao reinvented India, at home and abroad. Few world leaders have achieved so much with so little power. With exclusive access to Rao's never-before-seen personal papers as well as over a hundred interviews, this definitive biography provides new revelations on the Indian economy, nuclear programme, foreign policy and the Babri Masjid. While tracing Rao's life from a village in Telangana through his years in power and humiliation in retirement, the book never loses sight of the inner man, his difficult childhood, his corruptions and love affairs, his lingering loneliness. Meticulously researched and honestly told, this landmark political biography is a must-read for anyone interested in the man responsible for transforming India. This is the Hindi translation of the English edition.

About the Author
विनय सीतापति
राजनीतिविज्ञानी, पत्रकार और वकील हैं। अशोका यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और इंडियन एक्‍सप्रेस के लिए लिखते हैं। उन्‍होंने नेशनल लॉ स्‍कूल, बंगलौर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने प्रिंस्‍टन से राजनीति विज्ञान में शोध किया है।
English Translation
Vinay Sitapati is a political scientist, journalist, and lawyer. He teaches at Ashoka University and writes for the Indian Express. He has studied at the National Law School, Bangalore and Harvard University and is finishing his Ph.D. in politics from Princeton University.

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Reviews


एक विद्वान और गूढ़ प्रधानमंत्री का असाधारण वर्णन। इतिहास पी.वी. नरसिम्‍हा राव के प्रति निर्मम रहा है। विनय सीतापति ने उन्‍हें नया जीवन दिया है।
—के. नटवर सिंह
पी.वी. नरसिम्‍हा राव आसानी से समझ में न आने वाले और मुख्‍य रूप से एक असम्‍मानित व्‍यक्तित्‍व रहे हैं। उनके कार्य और प्रभाव के इस दिलचस्‍प अध्‍ययन में विनय सीतापति ने आधुनिक भारतीय इतिहास में राव को उनके सही स्‍थान पर फिर से स्‍थापित किया है।
—रामचंद्र गुहा
सीतापति, इतिहास और राजनीति को अंतरंग किस्‍सों की चाशनी में लिपटी हुई कड़वी दवा के रूप में पेश करते हैं... हाफ़-लायन लोकप्रिय और शैक्षणिक दायरों, दोनों में अपनी जगह बनाती है।
—फ़ोर्ब्‍स
विनय सीतापति के हाफ़-लायन (पेंग्विन) ने नरसिम्‍हा राव पर एक गंभीर विद्वतापूर्ण बहस शुरू की है।
—प्रताप भानु मेहता, सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च

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Table of contents


Anuvadak ki Aur Se

1. Adhjala Shav
2. Andhra ke Samajwadi, 1921-71
3. Kathputli Mukhyamantri, 1971-73
4. Nirvasan, 1973-74
5. Dilli Durbar, 1975-91
6. Sanyasi se Samrat
7. Arthvyavastha ka Uddhar, 1991-92
8. Arthvyavastha ka Vikas, 1992-96
9. Kalyankari Rajya?
10. Party aur Sansan mein Astitva Banaye Rakhna
11. Sonia ko Sambhalna
12. Babri Masjid ka Dhehna
13. Look East, Look West
14. Parmanu Hathiyar
15. Singh, Lomri, Chuha

Abhiswikriti
Tippaniyan
Anukramanika
Lekhak avum Anuvadak Parichay

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